बौद्ध दर्शन में ज्ञान परंपरा
DOI:
https://doi.org/10.64880/ijeagr.v1i2.10Keywords:
बौद्ध दर्शन, ज्ञान परंपरा, प्रज्ञा, निर्वाण, ज्ञानमीमांसा, महायान, हीनयान, भारतीय दर्शन।Abstract
बौद्ध दर्शन भारतीय ज्ञान परंपरा की एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली धारा है, जिसने मानव जीवन, ज्ञान, नैतिकता तथा मुक्ति के विषय में गहन चिंतन प्रस्तुत किया। प्रस्तुत शोधपत्र में बौद्ध दर्शन की ज्ञान परंपरा का विस्तृत अध्ययन किया गया है। इसमें बौद्ध दर्शन के मूल सिद्धांतों—चार आर्य सत्य, अष्टांगिक मार्ग, प्रतीत्यसमुत्पाद, अनात्मवाद तथा क्षणिकवाद—का विवेचन करते हुए ज्ञान की अवधारणा को स्पष्ट किया गया है। बौद्ध चिंतन में ज्ञान को “प्रज्ञा” के रूप में स्वीकार किया गया है, जो मनुष्य को अज्ञान और दुःख से मुक्त कर निर्वाण की ओर ले जाता है। इस शोधपत्र में बौद्ध ज्ञानमीमांसा के अंतर्गत प्रत्यक्ष और अनुमान जैसे प्रमाणों की चर्चा की गई है साथ ही बौद्ध शिक्षा परंपरा, नालंदा एवं विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालयों की भूमिका तथा महायान और हीनयान की ज्ञानधाराओं का भी विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि बौद्ध दर्शन ने भारतीय ज्ञान परंपरा को तर्क, अनुभव, करुणा और नैतिकता का नया आयाम प्रदान किया। अंततः यह शोधपत्र इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि बौद्ध ज्ञान परंपरा केवल धार्मिक विचारधारा नहीं, बल्कि मानव कल्याण और वैश्विक शांति का एक सार्वभौमिक मार्ग है, जिसकी प्रासंगिकता वर्तमान समय में भी बनी हुई है।
