समकालीन शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेशन: चुनौतियाँ, संभावनाएँ एवं भविष्य की दिशा

Authors

  • सोनू रजक असिस्टेंट प्रोफेसर, मानू कॉलेज आफ टीचर एजुकेशन दरभंगा (बिहार) मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी हैदराबाद (तेलंगाना) Author
  • नवी रज़ा ख़ाँ शोधार्थी, मानू कॉलेज ऑफ़ टीचर एजुकेशन दरभंगा, मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी हैदराबाद (तेलंगाना) Author
  • उत्तम कुमार शोधार्थी, मानू कॉलेज आफ टीचर एजुकेशन दरभंगा (बिहार) मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी हैदराबाद (तेलंगाना) Author

DOI:

https://doi.org/10.64880/ijeagr.v1i3.03

Keywords:

भारतीय ज्ञान परंपरा, समकालीन शिक्षा, समावेशन, मूल्यपरक शिक्षा, गुरु-शिष्य परंपरा, सांस्कृतिक विरासत, सर्वांगीण विकास, व्यक्तित्व निर्माण।

Abstract

भारत विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक है, जिसकी ज्ञान परंपरा हजारों वर्षों से मानव जीवन के सर्वांगीण विकास का आधार रही है। वैदिक साहित्य, उपनिषद, वेदांग, दर्शन, आयुर्वेद, योग, गणित, खगोल विज्ञान तथा नालंदा, तक्षशिला और विक्रमशिला जैसे प्राचीन शिक्षा केंद्र इस समृद्ध ज्ञान परंपरा के प्रमाण हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा केवल सूचना या कौशल तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका उद्देश्य व्यक्ति के बौद्धिक, नैतिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक विकास के माध्यम से आदर्श नागरिक का निर्माण करना रहा है। वर्तमान समय में शिक्षा का स्वरूप तीव्र गति से बदल रहा है। वैश्वीकरण, डिजिटलीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा बदलती सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं ने शिक्षा प्रणाली के समक्ष अनेक नई चुनौतियाँ प्रस्तुत की हैं। ऐसे समय में यह आवश्यक हो जाता है कि आधुनिक शिक्षा केवल रोजगारपरक न होकर मूल्यपरक, जीवनोपयोगी, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध तथा मानवीय संवेदनाओं से युक्त हो। भारतीय ज्ञान परंपरा इन आवश्यकताओं की पूर्ति करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 ने भारतीय ज्ञान प्रणाली (Indian Knowledge Systems–IKS) को शिक्षा के विभिन्न स्तरों पर समाहित करने पर विशेष बल दिया है। नीति का उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, परंपरा, नैतिक मूल्यों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, पर्यावरणीय चेतना तथा राष्ट्रीय गौरव की भावना का विकास करना है। इसके लिए पाठ्यक्रम, शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया, शोध तथा शिक्षक शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेशन पर विशेष ध्यान दिया गया है। हालाँकि आधुनिक शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रभावी समावेशन के समक्ष अनेक चुनौतियाँ भी विद्यमान हैं,  जैसे—उपयुक्त पाठ्य सामग्री का अभाव, प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी, पारंपरिक ज्ञान के वैज्ञानिक सत्यापन की आवश्यकता, भाषा संबंधी बाधाएँ, तथा वैश्विक शिक्षा व्यवस्था के साथ संतुलन स्थापित करने की चुनौती। इसके बावजूद भारतीय ज्ञान परंपरा विद्यार्थियों के समग्र विकास, मूल्यपरक शिक्षा, नवाचार, सतत विकास तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए व्यापक संभावनाएँ प्रस्तुत करती है। प्रस्तुत अध्याय में भारतीय ज्ञान परंपरा के स्वरूप, आधुनिक शिक्षा में उसके समावेशन की आवश्यकता, समावेशन के समक्ष उपस्थित चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं का विश्लेषण किया जाएगा। साथ ही, राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के संदर्भ में भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता का भी समालोचनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे आधुनिक शिक्षा को अधिक समावेशी, मूल्यपरक एवं भारतीय सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध बनाया जा सके।

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Published

2026-08-04

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Articles

How to Cite

समकालीन शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेशन: चुनौतियाँ, संभावनाएँ एवं भविष्य की दिशा. (2026). International Journal of Educational Analysis and Global Research (IJEAGR), 1(3), 22-30. https://doi.org/10.64880/ijeagr.v1i3.03