भारत में पर्यावरणीय न्याय: चुनौतियाँ, राजनीति और जन आंदोलन

Authors

  • कोमल शर्मा शोधार्थी, राजनीति विज्ञान विभाग, श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज, गोंडा Author

DOI:

https://doi.org/10.64880/ijeagr.v1i2.02

Keywords:

पर्यावरणीय न्याय, औद्योगीकरण, शहरीकरण, पर्यावरणीय क्षति, पर्यावरणीय विश्लेषण।

Abstract

भारत में पर्यावरणीय न्याय एक जटिल और बहुआयामी मुद्दा है, जहाँ पर्यावरणीय क्षति का बोझ असमान रूप से वितरित होता है। यह अध्ययन भारत में पर्यावरणीय न्याय की प्रमुख चुनौतियों—जैसे हाशिए के समुदायों पर असमान बोझ, नीतिगत कमज़ोरियाँ, विकास-पर्यावरण संघर्ष, और राजनीति की भूमिका—का विश्लेषण करता है। विशेष ध्यान महिलाओं पर पड़ने वाले असमान प्रभाव पर है, जो दैनिक जीवन में जल, ईंधन, और खाद्य असुरक्षा जैसी समस्याओं से सबसे अधिक प्रभावित होती हैं। शोध में सीमा अरोरा-जोंसन (Just Transitions), मुनीर अहमद मैगरी (Feminist Political Ecology), मुकुल शर्मा (Dalit Ecologies) और गीतांजलि अंगमो (लद्दाख के पर्यावरणीय संघर्ष) जैसे विद्वानों के दृष्टिकोण को शामिल किया गया है। पर्यावरणीय न्याय की प्राप्ति के लिए अंतर्विभागीय, लिंग-संवेदनशील और राजनीतिक रूप से जवाबदेह नीतियों की आवश्यकता है।

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Published

2026-05-20

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Section

Articles

How to Cite

भारत में पर्यावरणीय न्याय: चुनौतियाँ, राजनीति और जन आंदोलन. (2026). International Journal of Educational Analysis and Global Research (IJEAGR), 1(02), 05-12. https://doi.org/10.64880/ijeagr.v1i2.02